Musings

निगह – ए – लुत्फ़ ……

  • August 9, 2025
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continued …

मोहतरमा – कभी इश्क़ का इज़हार  भी किया ?

जनाब – “ कैसे करते इज़हार अपने इश्क़ का

हम तो अपने हदूद में क़ैद थे

जो दिल पे गुज़री वह रक़म करते गए “

 

मोहतरमा – तो आप हमारे  सवाल  का  जवाब  देने  से  गुरेज़   करेंगे  ?

इश्क़ परवान नहीं चढ़ा  ? ज़िंदगी  से  कोई गिला ?

 

जनाब – मुझे  किसी लिखे हुए कुछ  लफ़्ज़ याद आ गए  ,  मैं   पेशे  खिदमत  करना  चाहूँगा

“ हर  एक  को  नहीं  होता  इरफ़ान  मोहब्बत का

हर  एक  को  मोहब्बत  की  जागीर  नहीं  मिलती  “

 

आपके  सवाल  को  में अपने  लिखे  हुए  से  बयान  करूँगा  :

 

“ मैं  लफ़्ज़  लफ़्ज़  में  तुझ  को   तलाश  करता  हूँ

तू  मेरे  सवाल  में  आ “

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वरुण राणा

 

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