Musings

निगह- ए- लुत्फ़ …..

  • July 11, 2025
  • 1 year min Read
  • 0 comments

“ यह मेरा ब-फ़ैज़-ए-इश्क़

बेरंग है हयात तेरे इश्क़ के बैगर “

“ with the beneficence of love  ,

life is bleak without the grace of love “

 

……   Varun Rana  …….

 

 

मोहतरमा – ये शायरी कब , कैसे  ? इसके पीछे का सबब  ?

जनाब – ”  ज़िंदगी में किसी राह से गुजर रहे थे ।  किसी राह गुजर ने बेवजह दिल पर दस्तक दे डाली  ;   लिख दिया कलाम । उन के तस्सवुर पर । वजह दिल के करीब थी  ” …….

 

मोहतरमा – कोई किस्सा या  वाकिया आपके जहन में सवाल बन कर रह गया ?

जनाब  – ” बोले वो कुछ ऐसी बे -रूखी से

दिल ही में रहा सवाल अपना ”

 

 

 

……..  वरुण राणा    …………..

 

 

0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *.

Facebook
X (Twitter)
WhatsApp